बॉलीवुड के जाने-माने अभिनेता राजपाल यादव को दिल्ली हाईकोर्ट ने एक बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने उन्हें चेक बाउंस से जुड़े मामलों में आत्मसमर्पण (सरेंडर) करने का निर्देश दिया है। यह फैसला तब आया है जब अभिनेता बार-बार अदालत द्वारा तय की गई समझौते की भुगतान समय-सीमा को पूरा करने में विफल रहे।
क्या था पूरा मामला?
यह पूरा मामला चेक बाउंस से जुड़ा है, जिसे भारतीय दंड संहिता की धारा 138 के तहत दर्ज किया गया है। एक कंपनी ने राजपाल यादव और उनकी पत्नी पर आरोप लगाया था कि उन्होंने भुगतान के लिए दिए गए चेक बाउंस हो गए हैं। इस मामले में पहले राजपाल यादव को 6 महीने की सजा सुनाई गई थी। हालांकि, बाद में हाईकोर्ट ने उन्हें समझौता करने का मौका देने के लिए सजा को निलंबित कर दिया था।
अदालत ने क्या कहा?
समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि अदालत ने कई बार राजपाल यादव को भुगतान के लिए अतिरिक्त समय दिया और समझौते का अवसर भी प्रदान किया। लेकिन, बार-बार समय-सीमा पार होने के बावजूद, वे भुगतान करने में असमर्थ रहे। इस पर अदालत ने कहा कि अब वे इस तरह के वादे पर भरोसा नहीं कर सकते।
न्यायमूर्ति स्वराणा कांता शर्मा ने इस मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि बार-बार वादे करना और उन्हें पूरा न करना अदालत की सहानुभूति का दुरुपयोग है, और यह स्वीकार्य नहीं है।
अदालत के मुख्य निर्देश:
• अदालत ने पहले दिए गए संरक्षण आदेश को रद्द कर दिया है।
• राजपाल यादव को अब 4 फरवरी 2026 तक संबंधित जेल अधीक्षक के समक्ष आत्मसमर्पण करना होगा।
• जो राशि पहले अदालत में जमा की गई थी, उसे शिकायतकर्ता कंपनी को जारी कर दिया जाएगा।
• इस मामले की अगली सुनवाई 5 फरवरी 2026 को होगी, जिसमें अनुपालन रिपोर्ट मांगी जाएगी।
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