रोहतक में जतिन सरना: थिएटर दीवानगी का मेला, संघर्ष और चाय के सहारे गुजारे दिन

रोहतक में एक्टर जतिन सरना का अनोखा अंदाज़

रोहतक में प्रसिद्ध एक्टर जतिन सरना ने हाल ही में एक कार्यक्रम में शिरकत की, जहां उन्होंने थिएटर्स को 'दीवानों का मेला' बताया। यह बयान उनकी कला के प्रति गहरे जुनून और समर्पण को दर्शाता है। जतिन सरना ने अपने शुरुआती दिनों के संघर्ष को याद करते हुए बताया कि कैसे उन्होंने अभिनय की दुनिया में अपनी पहचान बनाने के लिए कड़ी मेहनत की।

संघर्ष के वो दिन: सड़कों पर सोना और चाय का सहारा

जतिन सरना ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत में बिताए कठिन दिनों को साझा किया। उन्होंने बताया कि किस तरह मुंबई जैसे शहर में संघर्ष करते हुए उन्हें कई बार सड़कों पर सोना पड़ा। पेट भरने और आगे बढ़ने के लिए वे अक्सर चाय के सहारे ही दिन गुजारते थे। यह उनके अटूट इरादे और अपने सपने को पूरा करने की ललक का प्रमाण है।

थिएटर: दीवानगी और जुनून का संगम

एक्टर जतिन सरना ने थिएटर्स को सिर्फ एक मंच नहीं, बल्कि दीवानगी का मेला करार दिया। उनके अनुसार, थिएटर वह जगह है जहाँ कलाकार बिना किसी डर के अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं। यह एक ऐसा माहौल है जो कलाकारों को प्रेरित करता है और उन्हें अपनी सीमाओं से आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करता है।

प्रेरणादायक संदेश

जतिन सरना की कहानी युवा कलाकारों के लिए एक बड़ी प्रेरणा है। उन्होंने साबित किया है कि सच्ची लगन, कड़ी मेहनत और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पण से किसी भी मुश्किल को पार किया जा सकता है। उनकी बातें दर्शाती हैं कि सफलता रातोंरात नहीं मिलती, बल्कि इसके पीछे सालों का संघर्ष और त्याग छिपा होता है।

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