नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने 'घूसखोर पंडित' नामक फिल्म की रिलीज पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने फिल्म निर्माताओं से फिल्म का नाम बदलने और नया नाम बताने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि किसी भी वर्ग को इस तरह बदनाम नहीं किया जा सकता।
मामला क्या है?
यह मामला एक याचिका पर आधारित है जिसमें फिल्म के नाम और उसकी सामग्री पर आपत्ति जताई गई थी। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि फिल्म का नाम आपत्तिजनक है और यह एक विशेष समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस एएस ओक की पीठ ने फिल्म के ट्रेलर की समीक्षा की और पाया कि फिल्म का नाम और कुछ दृश्य आपत्तिजनक हैं। कोर्ट ने कहा कि किसी भी फिल्म को रिलीज करने से पहले यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वह किसी समुदाय की भावनाओं को आहत न करे।
फिल्म का नाम बदलने की आवश्यकता
सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म निर्माताओं को निर्देश दिया है कि वे फिल्म का एक नया, आपत्तिजनक रहित नाम सोचें और उसे कोर्ट में प्रस्तुत करें। इसके बाद ही फिल्म की रिलीज पर आगे विचार किया जाएगा।
अन्य महत्वपूर्ण बिंदु:
• फिल्म को किसी भी वर्ग को बदनाम करने के उद्देश्य से नहीं बनाया जाना चाहिए।
• फिल्म सेंसर बोर्ड को भी इस तरह के मामलों में अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है।
• कला और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मतलब यह नहीं है कि किसी को भी अपमानित किया जाए।
यह फैसला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी है और यह सुनिश्चित करता है कि मनोरंजन के माध्यम का उपयोग जिम्मेदारी से किया जाए।
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