बॉलीवुड सिंगर-कंपोजर अमाल मलिक ने हाल ही में दिग्गज संगीतकार ए.आर. रहमान के उस बयान पर अपनी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें रहमान ने संगीत इंडस्ट्री में काम की कमी और पॉवर शिफ्ट को सांप्रदायिक रंग देने का इशारा किया था। ए.आर. रहमान के इस बयान पर फिल्म इंडस्ट्री के कई लोग अपनी राय रख रहे हैं।
भाई-भतीजावाद, सांप्रदायिकता नहीं:
इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के अनुसार, अमाल मलिक ने एक इंटरव्यू में कहा, "अगर इंडस्ट्री के नजरिए से देखें तो ए.आर. रहमान ने जो बात कही है, वह काफी हद तक सही है। लेकिन मैं इसके सांप्रदायिक पक्ष से सहमत नहीं हूं।" उन्होंने साफ किया कि आज का सिस्टम भाई-भतीजावाद (nepotism) और ग्रुपिज्म का है। कई कंपनियां अपने खास कलाकारों को ही प्रमोट करती हैं। अमाल ने यह भी कहा कि आजकल मैनेजमेंट और एजेंसियों का दौर है, जिसके चलते कलाकारों का निर्णय लेने की क्षमता पर नियंत्रण कम हो गया है।
कलाकारों को मिलना चाहिए मौका:
अमाल मलिक ने उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ निर्देशक और प्रोड्यूसर हमेशा खास कलाकारों के साथ ही काम करना पसंद करते हैं, जो अब इंडस्ट्री का एक सामान्य हिस्सा बन गया है। उन्होंने जोर देकर कहा, "अगर कोई बेहतर संगीत बना रहा है, तो उसे अवसर मिलना चाहिए, चाहे वह ए.आर. रहमान हों या कोई नया कलाकार।"
रहमान के बयान पर अमाल का नजरिया:
मलिक ने यह भी स्पष्ट किया कि ए.आर. रहमान के बयान को उनकी असुरक्षा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह इंडस्ट्री की कुछ व्यापक समस्याओं की तरफ इशारा है।
विवाद की जड़:
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब ए.आर. रहमान ने एक इंटरव्यू में कहा था कि पिछले कुछ सालों में फिल्मों में उनकी भागीदारी कम हुई है। उन्होंने इसके पीछे निर्णय लेने वालों को जिम्मेदार ठहराया, जो रचनात्मक नहीं हैं। रहमान के अनुसार, यह बदलाव कहीं न कहीं "संभवतः सांप्रदायिक" भी हो सकता है। इसी बयान के बाद से इंडस्ट्री में एक नई बहस छिड़ गई थी।
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