मुंबई में उस्ताद गुलाम मुस्तफा खान को श्रद्धांजलि: ए.आर. रहमान, सोनू निगम सहित दिग्गजों ने दी 'हाजरी'

मुंबई के बीकेसी स्थित जियो वर्ल्ड गार्डन में शनिवार को एक खास 'हाजरी' कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के ज़रिए पद्म विभूषण से सम्मानित महान संगीतकार और गुरु उस्ताद गुलाम मुस्तफा खान को उनकी पांचवीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि दी गई। यह पहला मौका था जब उस्ताद साहब के शिष्यों और देश के जाने-माने गायकों ने एक ही मंच साझा किया।

शिष्यों ने गुरु को दी 'हाजरी'

इस श्रद्धांजलि सभा में ए.आर. रहमान, हरिहरन, सोनू निगम और शान जैसे शीर्ष गायकों ने एक शिष्य की तरह अपने गुरु को याद किया। उस्ताद साहब के बेटे रब्बानी मुस्तफा खान और बहू नम्रता गुप्ता खान द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में संगीत की महफिल सजी।

संगीत की शाम में दिग्गजों की प्रस्तुति


ए.आर. रहमान ने सूफी गीतों से कार्यक्रम की शुरुआत की। उन्होंने 'कुन फाया कुन', 'ख्वाजा मेरे ख्वाजा' और 'अरजियां' जैसे अपने हिट गाने गाए। इसके बाद उन्होंने मुस्तफा परिवार के साथ 'आओ बलमा' और 'पिया हाजी अली' की प्रस्तुति दी।
शान ने 'मैं हूं डॉन', 'चांद सिफारिश' और 'ओम शांति ओम' जैसे अपने लोकप्रिय गाने सुनाए। साथ ही उन्होंने उस्ताद साहब की मशहूर गजल 'चले आओ' भी पेश की।
हरिहरन ने 'तू ही रे', 'रोजा', 'बाहों के दरमियां' और 'यादें' जैसे अपने सदाबहार गानों से समां बांधा।
सोनू निगम ने 'परदेसिया', 'कल हो ना हो', 'अभी मुझ में कहीं' और 'संदेशे आते हैं' जैसे गानों के साथ शाम का समापन किया।

कौन थे उस्ताद गुलाम मुस्तफा खान?

उस्ताद गुलाम मुस्तफा खान एक महान हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायक और संगीत गुरु थे। वे रामपुर-सहसवान घराने से ताल्लुक रखते थे। उनका जन्म 3 मार्च 1931 को उत्तर प्रदेश के बदायूं में हुआ था। अपनी संगीत प्रतिभा के कारण उन्हें 'जूनियर तानसेन' के नाम से भी जाना जाता था।

सम्मान और योगदान

संगीत के क्षेत्र में उनके अमूल्य योगदान के लिए उन्हें कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाजा गया, जिनमें पद्म श्री (1991), पद्म भूषण (2006), पद्म विभूषण (2018) और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (2003) शामिल हैं। उन्होंने लता मंगेशकर, आशा भोसले, ए.आर. रहमान, सोनू निगम सहित बॉलीवुड और शास्त्रीय संगीत के कई दिग्गज कलाकारों को संगीत की शिक्षा दी।

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