टेलीविजन और डिजिटल का संगम: जियोस्टार के आलोक जैन के साथ विशेष बातचीत

टेलीविजन का भविष्य और डिजिटल का प्रभाव: एक विस्तृत विश्लेषण

आज के डिजिटल युग में, यह आम धारणा है कि टेलीविजन का प्रभाव कम हो रहा है। लेकिन, इस बीच कलर्स चैनल ने अपने 18 साल पूरे कर लिए हैं, और जियो हॉटस्टार डिजिटल दर्शकों के लिए एक पसंदीदा मंच बन गया है। टेलीविजन और डिजिटल के बदलते समीकरण, दर्शकों की बदलती पसंद और कंटेंट की रणनीति पर जियोस्टार के आलोक जैन के साथ हुई एक खास बातचीत के प्रमुख अंश इस प्रकार हैं:

टेलीविजन की प्रासंगिकता: क्या यह खत्म हो रहा है?

यह सोचना कि टेलीविजन खत्म हो रहा है, पूरी तरह से गलत है। भारत में आज भी 80 से 90 करोड़ लोग टेलीविजन देखते हैं, जो इसे मनोरंजन का प्राथमिक माध्यम बनाता है। दर्शक औसतन प्रतिदिन दो से तीन घंटे टीवी देखते हैं। हमारे आसपास के अनुभव से यह महसूस हो सकता है कि देश भर में भी यही स्थिति है, लेकिन वास्तविकता इससे काफी अलग है।

डिजिटल और ओटीटी का बढ़ता प्रभाव

ओटीटी प्लेटफॉर्म की वृद्धि का मुख्य कारण दर्शकों को मिली सुविधा है - जब चाहें, जहां चाहें कंटेंट देखने की आजादी। इसका मतलब यह नहीं है कि टेलीविजन कमजोर हुआ है। आज भी लगभग 60 करोड़ लोग डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सक्रिय हैं, जबकि टीवी दर्शकों की संख्या करीब 90 करोड़ है। भारत में बनने वाला 80-90% कंटेंट आज भी टेलीविजन के लिए ही तैयार होता है।

कलर्स और जियो हॉटस्टार: कंटेंट का संतुलन

हम इन दोनों प्लेटफॉर्म्स को प्रतिस्पर्धा के रूप में नहीं देखते। हमारा लक्ष्य सिर्फ इतना है कि कंटेंट अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे। दर्शक टीवी पर देखें या डिजिटल पर, यह हमारे लिए गौण है। हम इसे एक परिवार के दो बच्चों की तरह मानते हैं - अगर दोनों अच्छा कर रहे हैं, तो टकराव की आवश्यकता नहीं है।

दर्शकों की बदलती पसंद को समझना

भारत तेजी से बदल रहा है, और पिछले 10-15 वर्षों में उपभोक्ता व्यवहार में बड़ा बदलाव आया है। यदि हम इस बदलाव को नहीं समझेंगे और उसके साथ खुद को नहीं बदलेंगे, तो हम पीछे रह जाएंगे। कंटेंट इंडस्ट्री को लगातार दर्शकों की बदलती सोच के साथ तालमेल बिठाना होता है।

कलर्स के कंटेंट में आया बदलाव

पहले कलर्स पर अक्सर "सास-बहू ड्रामा" का टैग लगाया जाता था। लेकिन पिछले दो वर्षों में, हमने दर्शकों को गहराई से समझने की कोशिश की है। हमने यह स्वीकार किया है कि जो पहले काम करता था, वह भविष्य में भी चलेगा, यह आवश्यक नहीं है। आज कलर्स पर कोई भी पारंपरिक सास-बहू शो नहीं है। उदाहरण के लिए:


महादेव एंड संस: एक पिता और परिवार की कहानी।
मन्नत: मां-बेटी के रिश्ते पर आधारित।
जट एंड जूलियट: कॉलेज रोमांस की कहानी।

यह बदलाव धीरे-धीरे दर्शकों तक पहुंचेगा।

असफल शोज को संभालना

किसी शो को बनाने में एक साल लग सकता है, लेकिन दर्शक आधे घंटे में उसका फैसला कर लेते हैं। यह इस इंडस्ट्री की सच्चाई है और इसे स्वीकार करना पड़ता है। कभी सफलता मिलती है, कभी नहीं, लेकिन कोशिशें जारी रहनी चाहिए।

रियलिटी शोज का भविष्य

'बिग बॉस' और 'लाफ्टर शेफ' जैसे रियलिटी शोज टीवी और डिजिटल दोनों पर रिकॉर्ड बना रहे हैं। हमारी कोशिश है कि अच्छे शो सभी प्लेटफॉर्म पर अच्छा प्रदर्शन करें। आने वाले समय में 'डी 50', 'स्प्लिट्सविला', 'खतरों के खिलाड़ी' जैसे शोज आएंगे। इसके अलावा, जियो हॉटस्टार पर इसरो और चंद्रयान मिशन पर आधारित एक फिक्शनल सीरीज भी दर्शकों को देखने को मिलेगी।

कलर्स और जियो हॉटस्टार की पहचान


कलर्स: हमेशा भारत की सामाजिक सच्चाइयों पर आधारित कहानियां दिखाने की कोशिश करता है, जो समाज को प्रेरित करें।
जियो हॉटस्टार: हम विभिन्न वर्गों के दर्शकों के लिए भावनात्मक और मनोरंजक कहानियां पेश कर रहे हैं। हमारी कोशिश यही है कि दर्शकों को लगे, "जिंदगी अच्छी है"।

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