मशहूर संगीतकार एआर रहमान के हालिया बयान ने बॉलीवुड में एक नई बहस छेड़ दी है। रहमान ने बीबीसी एशिया नेटवर्क को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि उन्हें सांप्रदायिक कारणों से पिछले 8 सालों से बॉलीवुड में काम नहीं मिल रहा है। इस बयान के बाद जहां कुछ लोगों ने उनकी बातों का समर्थन किया, वहीं कई लोगों ने इस पर आपत्ति भी जताई।
जावेद अख्तर का खंडन और महबूबा मुफ्ती का समर्थन
गीतकार जावेद अख्तर ने एआर रहमान के बयान का खंडन करते हुए कहा था कि उन्हें ऐसा कभी महसूस नहीं हुआ। उन्होंने कहा था कि वे मुंबई में रहते हैं और फिल्म इंडस्ट्री में सभी से मिलते हैं, जहां उन्हें कभी सांप्रदायिकता का अनुभव नहीं हुआ।
हालांकि, जम्मू और कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने जावेद अख्तर के इस रुख की आलोचना करते हुए एआर रहमान के बयान का समर्थन किया है। महबूबा मुफ्ती ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा, "जब जावेद अख्तर, एआर रहमान की बॉलीवुड में बढ़ती साम्प्रदायिकता को लेकर जताई गई चिंता को नजरअंदाज करते हैं, तो वह भारतीय मुसलमानों के उन अनुभवों को झुठलाते हैं जो उन्होंने खुद जिए हैं और जो समाज में साफ दिखाई देते हैं।"
उन्होंने आगे कहा, "इन अनुभवों में उनकी अपनी पत्नी शबाना आजमी के अनुभव भी शामिल हैं, जिन्होंने खुले तौर पर बताया है कि मुंबई जैसे आधुनिक और बड़े शहर में भी उन्हें मुस्लिम होने की वजह से घर नहीं दिया गया। बॉलीवुड हमेशा से भारत का एक छोटा रूप रहा है, जो देश की सामाजिक सच्चाइयों को दर्शाता है। इन अनुभवों को नजरअंदाज कर देने से आज के भारत की सच्चाई नहीं बदल जाती।"
क्या है पूरा विवाद?
एआर रहमान ने अपने इंटरव्यू में साफ तौर पर कहा था कि उन्हें बॉलीवुड में काम मिलने में सांप्रदायिक वजहों का असर दिखता है। उनके इस बयान ने फिल्म इंडस्ट्री में हलचल मचा दी और इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आने लगीं। जावेद अख्तर का बयान इसी कड़ी में आया था, जिसमें उन्होंने रहमान के दावे को खारिज किया था।
अब महबूबा मुफ्ती के समर्थन और जावेद अख्तर के खंडन के बाद यह मुद्दा और भी गरमा गया है, और बॉलीवुड में सांप्रदायिकता की मौजूदगी पर सवाल उठने लगे हैं।
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