हेमा मालिनी को वोटिंग के दौरान आम नागरिक का गुस्सा झेलना पड़ा, जानिए क्या है पूरा मामला

मुंबई: बॉलीवुड की सदाबहार अभिनेत्री और बीजेपी सांसद हेमा मालिनी को हाल ही में मुंबई में बीएमसी चुनाव के दौरान एक अप्रत्याशित स्थिति का सामना करना पड़ा। वोट डालने के बाद जब हेमा मालिनी पोलिंग बूथ के बाहर मीडिया से बात करने लगीं, तो वहां मौजूद एक नाराज आम नागरिक ने उन पर नियमों का उल्लंघन करने और 'स्पेशल ट्रीटमेंट' लेने का आरोप लगाया।

क्या है पूरा मामला?

गुरुवार को महाराष्ट्र में बीएमसी चुनाव के लिए वोटिंग हुई। इस दौरान हेमा मालिनी भी मुंबई में अपना वोट डालने पहुंचीं। वोट डालने के बाद, उन्होंने अपनी स्याही लगी उंगली मीडिया को दिखाई और संवाददाताओं से बातचीत करने लगीं। तभी, पोलिंग बूथ के बाहर मौजूद एक बुजुर्ग शख्स हेमा मालिनी के पास पहुंचे और अपनी नाराजगी जाहिर की।

बुजुर्ग शख्स का गुस्सा

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में, वह बुजुर्ग शख्स हेमा मालिनी से कहते दिख रहे हैं, "मैं पिछले 60 सालों से यहां रह रहा हूं और यहां पहली बार इतनी अराजकता देखी है। मैं सुबह 7:45 बजे से यहां इंतजार कर रहा हूं और 9:30 बजे वोट डाला। कोई जवाबदेही नहीं है, कोई जिम्मेदार नहीं है। यहां तक कि बीजेपी का कोई स्थानीय कार्यकर्ता भी मौजूद नहीं है।"

शख्स ने आरोप लगाया कि हेमा मालिनी को पोलिंग सेंटर में 'स्पेशल ट्रीटमेंट' मिल रहा था, जिसकी वजह से आम नागरिकों को परेशानी हो रही थी।

हेमा मालिनी और उनकी टीम की प्रतिक्रिया

वीडियो में देखा जा सकता है कि हेमा मालिनी इस स्थिति को संभालने के लिए अपनी टीम के एक सदस्य को आगे करती हैं। टीम का सदस्य बुजुर्ग शख्स से शांत होने और बाद में बात करने का अनुरोध करता है। हालांकि, शख्स और भड़क जाते हैं और कहते हैं कि बीजेपी के नेताओं को विशेष सुविधाएं मिलती हैं, जबकि आम लोगों के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर आम लोगों के साथ ऐसा व्यवहार होता रहा तो बीजेपी का वोट कट जाएगा।

हेमा मालिनी ने भी शख्स से शांत होने का अनुरोध किया और कहा कि वे बाद में बात करेंगे। इसके बाद, वह फिर से मीडिया से बात करने लगीं।

हेमा मालिनी का बयान

मीडिया से बातचीत में हेमा मालिनी ने सभी से वोट डालने की अपील की। उन्होंने कहा, "सभी लोगों को वोट देने के लिए आना चाहिए। जैसे मैं आज सुबह जल्दी आ गई, ताकि मैं अपना काम भी कर सकूं। यह मुंबई के हर नागरिक का कर्तव्य है।"

यह घटना सार्वजनिक स्थानों पर नेताओं और आम नागरिकों के बीच होने वाली बातचीत का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है, जो अक्सर व्यवस्था में खामियों और आम आदमी की निराशा को उजागर करती है।

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