“ज़िंदगी मेरे लिए अब असहनीय हो गई है। मुझे क्षमा कर दीजिए।”
ये शब्द थे प्रसिद्ध इतालवी–फ्रांसीसी गायिका और अभिनेत्री डालिडा के — एक ऐसी आत्मा के अंतिम शब्द, जो किसी एक दुख से नहीं, बल्कि वर्षों की मानसिक थकान और अकेलेपन से टूट चुकी थी।
दुनिया के लिए वह सुंदरता और सफलता की मिसाल थीं, लेकिन उनकी निजी ज़िंदगी दुख, सदमे और अधूरी इच्छाओं से भरी हुई थी। यह कोई संयोग नहीं था कि जिन चार पुरुषों से उन्होंने सच्चा प्रेम किया, उन सभी ने अपनी जीवनलीला स्वयं समाप्त कर ली — और अंत में डालिडा भी उसी रास्ते पर चल पड़ीं।
यह कहानी है एक ऐसी दिवा की, जिसका जीवन उतना ही सुंदर था जितनी उसकी आवाज़ — और उतना ही दर्दनाक जितना उसका अंतिम क्षण।
काहिरा से प्रसिद्धि तक: इओलांडा की कहानी
डालिडा का असली नाम इओलांडा क्रिस्टीना गिलियोटी था। उनका जन्म 17 जनवरी 1933 को मिस्र के काहिरा शहर में हुआ था। उनका बचपन बहुत कष्टों में बीता। बचपन में उन्हें आँखों की गंभीर बीमारी हो गई थी और कई बार शल्य चिकित्सा करानी पड़ी।
गरीब परिवार से होने के बावजूद, उनके भीतर कला के प्रति गहरा प्रेम था। उनके चाचा सिनेमा घर में फ़िल्म चलाने का काम करते थे, वहीं से उन्हें अभिनय और मंच की दुनिया से लगाव हो गया। विद्यालय के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में वह नियमित भाग लेने लगीं।
उन्होंने चुपचाप मिस ओंडीन सौंदर्य प्रतियोगिता में भाग लिया और दूसरा स्थान प्राप्त किया। परिवार की इच्छा के विरुद्ध उन्होंने अभिनय और मॉडलिंग को अपना जीवन मार्ग चुना और मिस्र में लोकप्रिय हो गईं।
बाद में वह फ्रांस की राजधानी पेरिस चली गईं, जहाँ पहले उन्होंने अभिनय किया और फिर 1956 में उनके गीत “बांबीनो” ने उन्हें अपार प्रसिद्धि दिला दी।
प्रेम का क्रूर खेल: दुख और मृत्यु की श्रृंखला
डालिडा का पेशेवर जीवन जितना ऊँचाइयों पर पहुँचा, उनका निजी जीवन उतना ही पीड़ा से भरता चला गया।
लुसियान मोरिस – पहला पति
लुसियान मोरिस एक संगीत प्रचारक थे, जिन्होंने डालिडा को प्रसिद्धि दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई। दोनों ने 1961 में विवाह किया, लेकिन एक वर्ष बाद ही अलग हो गए। फिर भी वे साथ मिलकर काम करते रहे।
11 सितंबर 1970 को लुसियान ने नींद की गोलियों की अधिक मात्रा लेकर अपना जीवन समाप्त कर लिया। कहा जाता है कि वह अकेलेपन और अलगाव के दुख को सहन नहीं कर पाए।
लुईजी टेंको – वह काली रात
गायक लुईजी टेंको के साथ डालिडा का गुप्त प्रेम संबंध था। 1967 में दोनों एक प्रसिद्ध संगीत प्रतियोगिता में भाग लेने पहुँचे।
जब लुईजी का गीत अस्वीकृत हो गया, तो उसी रात डालिडा ने उन्हें होटल के कमरे में मृत पाया। उन्होंने स्वयं को गोली मार ली थी।
इस घटना से डालिडा पूरी तरह टूट गईं। उन्होंने सार्वजनिक रूप से शोक प्रकट किया और एक महीने बाद स्वयं भी नींद की गोलियों से आत्महत्या करने का प्रयास किया। वह पाँच दिन तक बेहोशी की हालत में रहीं और कई महीनों तक उपचार चला।
माँ बनने का सपना टूट गया
एक युवक के साथ संबंध के दौरान डालिडा गर्भवती हो गईं। उन्हें गर्भपात कराना पड़ा और चिकित्सकों ने बताया कि वह अब कभी माँ नहीं बन सकतीं। इस समाचार ने उन्हें भीतर से तोड़ दिया।
माइक ब्रांट – एक और टूटता हुआ सितारा
बाद के वर्षों में डालिडा की मित्रता प्रसिद्ध गायक माइक ब्रांट से हुई। वह लंबे समय से मानसिक अवसाद से पीड़ित थे।
25 अप्रैल 1975 को उन्होंने एक ऊँची इमारत से कूदकर अपनी जान दे दी। यह तीसरी बार था जब डालिडा ने किसी अपने को इस तरह खोया।
रिचर्ड शान्फ्रे – आखिरी सहारा भी छूट गया
माइक ब्रांट की मृत्यु के बाद डालिडा को कुछ सहारा मिला रिचर्ड शान्फ्रे से, लेकिन जुलाई 1983 में उन्होंने भी कार में दम घुटने से अपना जीवन समाप्त कर लिया।
डालिडा की अपनी लड़ाई और अंतिम विदाई
लगातार मिलते इन आघातों ने डालिडा को भीतर से तोड़ दिया था। 1985 तक तेज़ मंच प्रकाश के कारण उनकी आँखों की रोशनी बहुत कम हो गई। दो बार शल्य चिकित्सा हुई, लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ।
उन्हें मंच और गायन से दूर होना पड़ा — वही मंच जो उनका जीवन था।
2 और 3 मई 1987 की रात उन्होंने एक पत्र लिखा:
“ज़िंदगी मेरे लिए अब असहनीय हो गई है। मुझे क्षमा कर दीजिए।”
इसके बाद उन्होंने नींद की गोलियों की अधिक मात्रा ले ली और अगली सुबह उनका देहांत हो गया।
एक अमर विरासत
इतने दुखों के बावजूद, डालिडा आज भी संगीत की दुनिया में अमर हैं। उनके जीवन पर कई फ़िल्में और धारावाहिक बनाए गए हैं। उनके गीत आज भी पूरी दुनिया में सुने जाते हैं।
डालिडा हमें यह सिखाती हैं कि बाहरी चमक के पीछे इंसान कितना टूटा हुआ और अकेला हो सकता है।
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