फिल्म धुरंधर की ऐतिहासिक सफलता पर एक्टर अश्विन धर का कहना है कि उन्हें कहानी सुनते वक्त ही एहसास हो गया था कि यह फिल्म कुछ अलग करने वाली है। बॉक्स ऑफिस पर 1000 करोड़ क्लब में शामिल होकर फिल्म ने न सिर्फ कई रिकॉर्ड तोड़े, बल्कि लंबे समय से खाली पड़े सिनेमाघरों में भी रौनक लौटा दी। अश्विन के मुताबिक फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसकी कहानी और हर किरदार का गहरा असर है, जिसने शोले के बाद शायद पहली बार सभी कैरेक्टर्स को बराबर की लोकप्रियता दिलाई। अरशद पप्पू के किरदार में मिले प्यार ने उनके करियर को नया मोड़ दिया है और दर्शक अब बेसब्री से पार्ट 2 का इंतजार कर रहे हैं। फिल्म धुरंधर ने अच्छी-अच्छी फिल्मों का रिकॉर्ड तोड़कर 1000 करोड़ के क्लब में अपनी जगह बना ली है, क्या कहेंगे इस पर? फिल्म उम्मीद से ज्यादा अच्छी चल रही है बॉक्स ऑफिस पर और लोगों को पसंद आ रही है। कुछ दिन रुक जाइए और ये फिल्म कई नए रिकॉर्ड बना सकती है। जब फिल्म के डायरेक्टर सर आदित्य हमें ये फिल्म सुना रहे थे, तो फिल्म की कहानी और हर किरदार के बारे में जानकर ये एहसास जरूर हो गया था कि ये कुछ अलग है। जब फिल्म रिलीज हुई तो मैं बस प्रार्थना कर रहा था कि फिल्म चल जाए। पहला दिन गया, दूसरा दिन गया, 4-5 दिन बीत जाने के बाद मेरा फोन बजने लगा। मैं जिन्हें जानता था और खासकर जिन्हें नहीं भी जानता था, वो मुझे फोन करके शुभकामनाएं देने लगे। मेरे समझ में तो नहीं आया कि ये क्या हो गया, क्योंकि इससे पहले मैंने ये चीजें अनुभव नहीं की थीं। लोग मुझे सड़कों पर चलते हुए रोक-रोक कर पूछने लगे कि आप ही हैं ना अरशद पप्पू, और मैं कहता था कि हां। अब ये बताइए जरा कि आखिर इस फिल्म के पार्ट 2 में रहमान डकैत की मौत का बदला कौन लेने वाला है? मैं आपको बता दूं कि जो भी शख्स इस फिल्म को देखकर थिएटर से बाहर निकल रहा है, उसका दिमाग इसी जगह घूम रहा है कि आखिर रहमान डकैत का बदला कौन लेगा। तीसरा हफ्ता हो गया है फिल्म को रिलीज हुए और फिल्म एक से एक अच्छी फिल्मों के रिकॉर्ड को पछाड़ने में कामयाब हो रही है। इस सवाल का जवाब जल्द ही दर्शकों को पार्ट 2 में मिलेगा, जो मार्च में रिलीज होगी। आपकी फिल्म ने बॉक्स ऑफिस रिकॉर्ड तोड़ने के साथ ही थिएटर के उस सन्नाटे को भी खत्म किया है, जो काफी वक्त से देखने को मिल रहा था? इसमें कोई शक नहीं है कि हमारी फिल्म एक माइलस्टोन बन गई है। हमारी फिल्म धुरंधर ने लोगों को एक बार फिर थिएटर की तरफ लाने के लिए पुश किया है। कोई प्रमोशन नहीं, बल्कि ये सिर्फ वर्ड ऑफ माउथ का कमाल है, जिसकी वजह से लोग खिंचे चले आए सिनेमाघरों की तरफ। रही बात कॉन्ट्रोवर्सी की, तो एक अच्छी कहानी और एक अच्छी आर्ट फिल्म का कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। जब फिल्म एक बार चल पड़ती है, तो उसकी आंधी कोई नहीं रोक सकता। शोले के बाद शायद ये एक दूसरी फिल्म बनने जा रही है, जिसके हर एक किरदार को पॉपुलैरिटी मिली है और गजब की कहानी है। हां बिल्कुल, मैं आपको बताऊं कि एक छोटा से छोटा किरदार भी इस फिल्म से पॉपुलर हुआ है। कल की ही बात है, मुझे एक एक्टर मिला जिसका फिल्म में छोटा सा एंट्री सीन था। उसने मुझे आकर कहा कि लोग मुझे पहचानने लगे हैं, जबकि मेरा तो इतना बड़ा सीन भी नहीं था। इस फिल्म ने लोगों के दिलों और दिमाग में जो इंपैक्ट छोड़ा है, वो शायद शोले के बाद कोई फिल्म कर पाई है। अरशद पप्पू के किरदार में अपने आप को ढालने के लिए आपने कितनी मेहनत की? चूंकि कहानी रियल लाइफ इंसिडेंट और किरदारों पर आधारित थी, तो डायरेक्टर सर ने हमें अपने-अपने किरदार को लेकर पूरी डिटेल दी थी कि वो क्या करता था, कहां से था और उसकी पास्ट स्टोरी क्या है। फिर अरशद पप्पू जैसा दिखने के लिए कॉस्ट्यूम का ध्यान रखा गया। हमारे पास बहुत मटीरियल था अपने किरदार को समझने के लिए। बस यही कोशिश थी कि जब स्क्रीन पर मैं आऊं, तो लोगों को लगे कि मैं ही अरशद पप्पू हूं, और वैसा ही रिस्पॉन्स मिला। आपकी ऑफस्क्रीन बॉन्डिंग अपने को-स्टार्स के साथ कैसी थी, चाहे वो अक्षय खन्ना हों या फिर रणवीर सिंह? मेरा अक्षय खन्ना के साथ ऑनस्क्रीन सीन नहीं था, तो ज्यादा बातें नहीं हुईं। लेकिन जो मैंने ऑफस्क्रीन नोटिस किया और लोगों से सुना, वो ये कि वो बहुत ही मेहनती इंसान हैं। सरल स्वभाव के हैं, किसी तरह की कोई हैंकी पैंकी नहीं। बस चुपचाप बैठकर अपना काम करते हैं।रणवीर सिंह के बारे में तो मैं क्या ही कहूं, वो इंसान इतना प्यारा है और सब उसे बहुत प्यार भी करते हैं। सेट पर वो एक एनर्जी का गोला होता है। एक्टर से लेकर टेक्नीशियन तक, हर किसी से बड़े सम्मान से बात करता है। फिल्म के सारे गाने इस साल के ट्रेंड सेटर हैं। हर कोई उन पर झूमता-गाता नजर आ रहा है और 80-90 के गानों का भी इस्तेमाल फिल्म में किया गया है। हां, एक तरह से फिल्म का हिट होना उसके गानों से ही शुरू हुआ। लोगों ने FA9LA सॉन्ग सुना, अक्षय खन्ना का डांस उसमें पसंद आया, रील्स बननी शुरू हुईं सोशल मीडिया पर। बस वहीं से लोगों का इंटरेस्ट जगा। मेरी जब एंट्री होती है, तो बैकग्राउंड में मोनिका बजता है। तो कई गानों को इस फिल्म से रीबर्थ भी मिला है। अंधेरी के आराम नगर की गलियों से लियारी तक का सफर कैसा रहा? इस फिल्म जर्नी की शुरुआत और एक हिट फिल्म में अहम किरदार निभाने का अनुभव शेयर करें। शुरुआत थिएटर से हुई। ठान लिया था कि एक्टर ही बनना है और तरह-तरह के रोल करने हैं। मुझे याद है कि मैं मशहूर नाटककार आमिर रजा हुसैन का प्ले फिफ्टी डेज ऑफ वॉर कर रहा था दिल्ली में, और मुख्य किरदार मेरा ही था। उस प्ले को देखने कई कास्टिंग डायरेक्टर आए और वो सुपरहिट रहा। वहीं एक कास्टिंग डायरेक्टर मुझसे मिले और बोले कि बगल में ही एक फिल्म की कास्टिंग हो रही है, तुम ऑडिशन दे दो। मैं उनके कहने पर गया और मेरा सेलेक्शन तुरंत हो गया। फिल्म थी काबुल एक्सप्रेस। फिर मुझे फिल्म हाईजैक मिली। बाद में डी डे, जिसमें मैंने इरफान खान के साथ काम किया। फिल्मों में कहीं न कहीं मुझे बैक टू बैक एक जैसे रोल मिलने लगे। फिर फिल्म द एक्सपोज आई, जिसे अनंत महादेवन ने डायरेक्ट किया था। उसके बाद उन्हीं की एक रफ बुक में मुझे केमिस्ट्री टीचर का रोल करने का मौका मिला। ऐसे ही करते-करते फिल्म धुरंधर तक का सफर तय किया। आपका पहला प्यार क्या है, थिएटर, टेलीविजन या फिर सिनेमा? मेरा पहला प्यार सिर्फ और सिर्फ थिएटर ही है। जिसने एक बार थिएटर कर लिया या उस फीलिंग को एक्सपीरियंस कर लिया, वो थिएटर के बिना नहीं रह सकता। लाइव परफॉर्मेंस का अपना ही मजा है। मुझे इस आर्ट में बहुत ज्यादा सैटिस्फैक्शन मिलता है। मेरे अंदर कभी ये नहीं था कि मुझे पॉपुलर होना है। ये मेरी डेस्टिनी थी, जो मुझे यहां तक ले आई और अरशद पप्पू और धुरंधर जैसी चीजें मेरे साथ हुईं। एक्टिंग का कीड़ा क्या आपके अंदर बचपन से था या बड़े होते-होते इस टैलेंट को पहचाना? मैं बचपन से ऐसा ही था। मुझे पता था कि मैं एक्टर बनना चाहता हूं। किसी की मिमिक्री करना, नाचना-गाना मुझे बचपन से ही पसंद था। मैं ऐसा लड़का था कि हर कोई मेरे बारे में जानता था कि वो फलां-फलां घर में रहता है, शायद मेरी अजीब हरकतों की वजह से। बचपन से ही शर्म नहीं थी। नाटक करना, नकल करना, सबको पता था कि मैं किस घर में रहता हूं, मेरी हरकतों की वजह से। जिस तरह की आपने फिल्में की हैं, चाहे वो काबुल एक्सप्रेस हो, हाईजैक हो या फिर अब धुरंधर, क्या आपको लगता है कि बॉलीवुड ने आपको टाइपकास्ट कर दिया है? देखिए, जब किसी एक्टर को पहली बार पहचान मिलती है और लोग उसे जानने लगते हैं, तो वो टाइपकास्ट हो ही जाता है। क्योंकि दर्शक फिर उसे वैसे ही रोल में देखना पसंद करते हैं। मुझे शुरुआत से ही फिल्मों में टेररिस्ट बनने के रोल ऑफर हुए हैं। हां, लेकिन जब आप एक बार फेमस हो जाते हैं, तो आपके पास उसे बदलने का चॉइस जरूर होता है। आखिर में मैं यही कहूंगा कि जिन्होंने फिल्म धुरंधर अभी तक नहीं देखी है, वो पहली फुर्सत में जाकर इस फिल्म को सिनेमाघरों में देखें। हमारी इस फिल्म से इंडस्ट्री को ऑक्सीजन मिल गई है।
शोले के बाद ऐसा इंपैक्ट पहली बार दिखा:धुरंधर के अरशद पप्पू बोले- फिल्म थिएटर को सन्नाटे से बाहर लाई, इंडस्ट्री को मिला ऑक्सीजन
January 08, 2026
0
फिल्म धुरंधर की ऐतिहासिक सफलता पर एक्टर अश्विन धर का कहना है कि उन्हें कहानी सुनते वक्त ही एहसास हो गया था कि यह फिल्म कुछ अलग करने वाली है। बॉक्स ऑफिस पर 1000 करोड़ क्लब में शामिल होकर फिल्म ने न सिर्फ कई रिकॉर्ड तोड़े, बल्कि लंबे समय से खाली पड़े सिनेमाघरों में भी रौनक लौटा दी। अश्विन के मुताबिक फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसकी कहानी और हर किरदार का गहरा असर है, जिसने शोले के बाद शायद पहली बार सभी कैरेक्टर्स को बराबर की लोकप्रियता दिलाई। अरशद पप्पू के किरदार में मिले प्यार ने उनके करियर को नया मोड़ दिया है और दर्शक अब बेसब्री से पार्ट 2 का इंतजार कर रहे हैं। फिल्म धुरंधर ने अच्छी-अच्छी फिल्मों का रिकॉर्ड तोड़कर 1000 करोड़ के क्लब में अपनी जगह बना ली है, क्या कहेंगे इस पर? फिल्म उम्मीद से ज्यादा अच्छी चल रही है बॉक्स ऑफिस पर और लोगों को पसंद आ रही है। कुछ दिन रुक जाइए और ये फिल्म कई नए रिकॉर्ड बना सकती है। जब फिल्म के डायरेक्टर सर आदित्य हमें ये फिल्म सुना रहे थे, तो फिल्म की कहानी और हर किरदार के बारे में जानकर ये एहसास जरूर हो गया था कि ये कुछ अलग है। जब फिल्म रिलीज हुई तो मैं बस प्रार्थना कर रहा था कि फिल्म चल जाए। पहला दिन गया, दूसरा दिन गया, 4-5 दिन बीत जाने के बाद मेरा फोन बजने लगा। मैं जिन्हें जानता था और खासकर जिन्हें नहीं भी जानता था, वो मुझे फोन करके शुभकामनाएं देने लगे। मेरे समझ में तो नहीं आया कि ये क्या हो गया, क्योंकि इससे पहले मैंने ये चीजें अनुभव नहीं की थीं। लोग मुझे सड़कों पर चलते हुए रोक-रोक कर पूछने लगे कि आप ही हैं ना अरशद पप्पू, और मैं कहता था कि हां। अब ये बताइए जरा कि आखिर इस फिल्म के पार्ट 2 में रहमान डकैत की मौत का बदला कौन लेने वाला है? मैं आपको बता दूं कि जो भी शख्स इस फिल्म को देखकर थिएटर से बाहर निकल रहा है, उसका दिमाग इसी जगह घूम रहा है कि आखिर रहमान डकैत का बदला कौन लेगा। तीसरा हफ्ता हो गया है फिल्म को रिलीज हुए और फिल्म एक से एक अच्छी फिल्मों के रिकॉर्ड को पछाड़ने में कामयाब हो रही है। इस सवाल का जवाब जल्द ही दर्शकों को पार्ट 2 में मिलेगा, जो मार्च में रिलीज होगी। आपकी फिल्म ने बॉक्स ऑफिस रिकॉर्ड तोड़ने के साथ ही थिएटर के उस सन्नाटे को भी खत्म किया है, जो काफी वक्त से देखने को मिल रहा था? इसमें कोई शक नहीं है कि हमारी फिल्म एक माइलस्टोन बन गई है। हमारी फिल्म धुरंधर ने लोगों को एक बार फिर थिएटर की तरफ लाने के लिए पुश किया है। कोई प्रमोशन नहीं, बल्कि ये सिर्फ वर्ड ऑफ माउथ का कमाल है, जिसकी वजह से लोग खिंचे चले आए सिनेमाघरों की तरफ। रही बात कॉन्ट्रोवर्सी की, तो एक अच्छी कहानी और एक अच्छी आर्ट फिल्म का कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। जब फिल्म एक बार चल पड़ती है, तो उसकी आंधी कोई नहीं रोक सकता। शोले के बाद शायद ये एक दूसरी फिल्म बनने जा रही है, जिसके हर एक किरदार को पॉपुलैरिटी मिली है और गजब की कहानी है। हां बिल्कुल, मैं आपको बताऊं कि एक छोटा से छोटा किरदार भी इस फिल्म से पॉपुलर हुआ है। कल की ही बात है, मुझे एक एक्टर मिला जिसका फिल्म में छोटा सा एंट्री सीन था। उसने मुझे आकर कहा कि लोग मुझे पहचानने लगे हैं, जबकि मेरा तो इतना बड़ा सीन भी नहीं था। इस फिल्म ने लोगों के दिलों और दिमाग में जो इंपैक्ट छोड़ा है, वो शायद शोले के बाद कोई फिल्म कर पाई है। अरशद पप्पू के किरदार में अपने आप को ढालने के लिए आपने कितनी मेहनत की? चूंकि कहानी रियल लाइफ इंसिडेंट और किरदारों पर आधारित थी, तो डायरेक्टर सर ने हमें अपने-अपने किरदार को लेकर पूरी डिटेल दी थी कि वो क्या करता था, कहां से था और उसकी पास्ट स्टोरी क्या है। फिर अरशद पप्पू जैसा दिखने के लिए कॉस्ट्यूम का ध्यान रखा गया। हमारे पास बहुत मटीरियल था अपने किरदार को समझने के लिए। बस यही कोशिश थी कि जब स्क्रीन पर मैं आऊं, तो लोगों को लगे कि मैं ही अरशद पप्पू हूं, और वैसा ही रिस्पॉन्स मिला। आपकी ऑफस्क्रीन बॉन्डिंग अपने को-स्टार्स के साथ कैसी थी, चाहे वो अक्षय खन्ना हों या फिर रणवीर सिंह? मेरा अक्षय खन्ना के साथ ऑनस्क्रीन सीन नहीं था, तो ज्यादा बातें नहीं हुईं। लेकिन जो मैंने ऑफस्क्रीन नोटिस किया और लोगों से सुना, वो ये कि वो बहुत ही मेहनती इंसान हैं। सरल स्वभाव के हैं, किसी तरह की कोई हैंकी पैंकी नहीं। बस चुपचाप बैठकर अपना काम करते हैं।रणवीर सिंह के बारे में तो मैं क्या ही कहूं, वो इंसान इतना प्यारा है और सब उसे बहुत प्यार भी करते हैं। सेट पर वो एक एनर्जी का गोला होता है। एक्टर से लेकर टेक्नीशियन तक, हर किसी से बड़े सम्मान से बात करता है। फिल्म के सारे गाने इस साल के ट्रेंड सेटर हैं। हर कोई उन पर झूमता-गाता नजर आ रहा है और 80-90 के गानों का भी इस्तेमाल फिल्म में किया गया है। हां, एक तरह से फिल्म का हिट होना उसके गानों से ही शुरू हुआ। लोगों ने FA9LA सॉन्ग सुना, अक्षय खन्ना का डांस उसमें पसंद आया, रील्स बननी शुरू हुईं सोशल मीडिया पर। बस वहीं से लोगों का इंटरेस्ट जगा। मेरी जब एंट्री होती है, तो बैकग्राउंड में मोनिका बजता है। तो कई गानों को इस फिल्म से रीबर्थ भी मिला है। अंधेरी के आराम नगर की गलियों से लियारी तक का सफर कैसा रहा? इस फिल्म जर्नी की शुरुआत और एक हिट फिल्म में अहम किरदार निभाने का अनुभव शेयर करें। शुरुआत थिएटर से हुई। ठान लिया था कि एक्टर ही बनना है और तरह-तरह के रोल करने हैं। मुझे याद है कि मैं मशहूर नाटककार आमिर रजा हुसैन का प्ले फिफ्टी डेज ऑफ वॉर कर रहा था दिल्ली में, और मुख्य किरदार मेरा ही था। उस प्ले को देखने कई कास्टिंग डायरेक्टर आए और वो सुपरहिट रहा। वहीं एक कास्टिंग डायरेक्टर मुझसे मिले और बोले कि बगल में ही एक फिल्म की कास्टिंग हो रही है, तुम ऑडिशन दे दो। मैं उनके कहने पर गया और मेरा सेलेक्शन तुरंत हो गया। फिल्म थी काबुल एक्सप्रेस। फिर मुझे फिल्म हाईजैक मिली। बाद में डी डे, जिसमें मैंने इरफान खान के साथ काम किया। फिल्मों में कहीं न कहीं मुझे बैक टू बैक एक जैसे रोल मिलने लगे। फिर फिल्म द एक्सपोज आई, जिसे अनंत महादेवन ने डायरेक्ट किया था। उसके बाद उन्हीं की एक रफ बुक में मुझे केमिस्ट्री टीचर का रोल करने का मौका मिला। ऐसे ही करते-करते फिल्म धुरंधर तक का सफर तय किया। आपका पहला प्यार क्या है, थिएटर, टेलीविजन या फिर सिनेमा? मेरा पहला प्यार सिर्फ और सिर्फ थिएटर ही है। जिसने एक बार थिएटर कर लिया या उस फीलिंग को एक्सपीरियंस कर लिया, वो थिएटर के बिना नहीं रह सकता। लाइव परफॉर्मेंस का अपना ही मजा है। मुझे इस आर्ट में बहुत ज्यादा सैटिस्फैक्शन मिलता है। मेरे अंदर कभी ये नहीं था कि मुझे पॉपुलर होना है। ये मेरी डेस्टिनी थी, जो मुझे यहां तक ले आई और अरशद पप्पू और धुरंधर जैसी चीजें मेरे साथ हुईं। एक्टिंग का कीड़ा क्या आपके अंदर बचपन से था या बड़े होते-होते इस टैलेंट को पहचाना? मैं बचपन से ऐसा ही था। मुझे पता था कि मैं एक्टर बनना चाहता हूं। किसी की मिमिक्री करना, नाचना-गाना मुझे बचपन से ही पसंद था। मैं ऐसा लड़का था कि हर कोई मेरे बारे में जानता था कि वो फलां-फलां घर में रहता है, शायद मेरी अजीब हरकतों की वजह से। बचपन से ही शर्म नहीं थी। नाटक करना, नकल करना, सबको पता था कि मैं किस घर में रहता हूं, मेरी हरकतों की वजह से। जिस तरह की आपने फिल्में की हैं, चाहे वो काबुल एक्सप्रेस हो, हाईजैक हो या फिर अब धुरंधर, क्या आपको लगता है कि बॉलीवुड ने आपको टाइपकास्ट कर दिया है? देखिए, जब किसी एक्टर को पहली बार पहचान मिलती है और लोग उसे जानने लगते हैं, तो वो टाइपकास्ट हो ही जाता है। क्योंकि दर्शक फिर उसे वैसे ही रोल में देखना पसंद करते हैं। मुझे शुरुआत से ही फिल्मों में टेररिस्ट बनने के रोल ऑफर हुए हैं। हां, लेकिन जब आप एक बार फेमस हो जाते हैं, तो आपके पास उसे बदलने का चॉइस जरूर होता है। आखिर में मैं यही कहूंगा कि जिन्होंने फिल्म धुरंधर अभी तक नहीं देखी है, वो पहली फुर्सत में जाकर इस फिल्म को सिनेमाघरों में देखें। हमारी इस फिल्म से इंडस्ट्री को ऑक्सीजन मिल गई है।


