सोमवार शाम को मुंबई में धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म इक्कीस की स्क्रीनिंग रखी गई थी, जिसमें फिल्म इंडस्ट्री की तमाम हस्तियां शामिल हुई हैं। इस दौरान रेखा, धर्मेंद्र की तस्वीर देखकर इमोशनल हो गईं और उन्होंने तस्वीर के सामने हाथ जोड़ लिए। फिल्म इक्कीस 1 जनवरी को रिलीज हो रही इक्कीस एक वॉर बायोपिक है, जो सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल की सच्ची कहानी पर आधारित है। अरुण खेत्रपाल भारत के सबसे युवा परमवीर चक्र विजेता थे, जिन्होंने 1971 के भारत–पाक युद्ध में असाधारण वीरता दिखाई थी। फिल्म में अमिताभ बच्चन के नाती अगस्त्य नंदा अरुण खेत्रपाल की भूमिका निभा रहे हैं, जबकि धर्मेंद्र उनके पिता बने हैं। फिल्म इक्कीस का निर्देशन श्रीराम राघवन ने किया है और इसे दिनेश विजन के मैडॉक फिल्म्स ने प्रोड्यूस किया है। बता दें कि इस फिल्म के लिए धर्मेंद्र ने कविता लिखी है और उसे अपनी आवाज भी दी थी। इस कविता का नाम है "अज भी जी करदा ऐ, पिंड अपने नू जानवा"। जिसका हिंदी में मतलब है कि आज भी दिल करता है कि अपने गांव चला जाऊं। यह कविता अपने गांव के प्रति एक व्यक्ति की भावनाओं और यादों को दिखाती है। धर्मेंद्र इस वीडियो में अपने गांव के लिए प्यार और वहां लौटने की इच्छा को शब्दों में बयां करते हैं।
धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म इक्कीस की स्क्रीनिंग:पिता की फोटो देख ठहरे सनी, धर्मेंद्र के पोस्टर के आगे रेखा ने जोड़े हाथ; सलमान खान भी हुए शामिल
January 06, 2026
0
सोमवार शाम को मुंबई में धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म इक्कीस की स्क्रीनिंग रखी गई थी, जिसमें फिल्म इंडस्ट्री की तमाम हस्तियां शामिल हुई हैं। इस दौरान रेखा, धर्मेंद्र की तस्वीर देखकर इमोशनल हो गईं और उन्होंने तस्वीर के सामने हाथ जोड़ लिए। फिल्म इक्कीस 1 जनवरी को रिलीज हो रही इक्कीस एक वॉर बायोपिक है, जो सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल की सच्ची कहानी पर आधारित है। अरुण खेत्रपाल भारत के सबसे युवा परमवीर चक्र विजेता थे, जिन्होंने 1971 के भारत–पाक युद्ध में असाधारण वीरता दिखाई थी। फिल्म में अमिताभ बच्चन के नाती अगस्त्य नंदा अरुण खेत्रपाल की भूमिका निभा रहे हैं, जबकि धर्मेंद्र उनके पिता बने हैं। फिल्म इक्कीस का निर्देशन श्रीराम राघवन ने किया है और इसे दिनेश विजन के मैडॉक फिल्म्स ने प्रोड्यूस किया है। बता दें कि इस फिल्म के लिए धर्मेंद्र ने कविता लिखी है और उसे अपनी आवाज भी दी थी। इस कविता का नाम है "अज भी जी करदा ऐ, पिंड अपने नू जानवा"। जिसका हिंदी में मतलब है कि आज भी दिल करता है कि अपने गांव चला जाऊं। यह कविता अपने गांव के प्रति एक व्यक्ति की भावनाओं और यादों को दिखाती है। धर्मेंद्र इस वीडियो में अपने गांव के लिए प्यार और वहां लौटने की इच्छा को शब्दों में बयां करते हैं।


