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फिल्म '45': शिवा राजकुमार और अर्जुन जन्य की दो यूनिवर्स की भावनात्मक कहानी, साउथ सिनेमा की सफलता के राज

साउथ सुपरस्टार शिवा राजकुमार और निर्देशक अर्जुन जन्य की कन्नड़ फिल्म ‘45’ अब हिंदी दर्शकों के लिए भी रिलीज हो रही है। यह फिल्म एक गहरी और भावनात्मक कहानी है जो कोविड के दौरान अर्जुन जन्य के निजी नुकसान से प्रेरित है, जहां उन्होंने जीवन और मृत्यु के रिश्ते को दो समानांतर यूनिवर्स के माध्यम से दर्शाया है।

कहानी का विचार और प्रेरणा निर्देशक अर्जुन जन्य ने अपने भाई के निधन के बाद गरुड़ पुराण से प्रेरित होकर इस अनोखी अवधारणा को विकसित किया। उन्होंने इस कहानी को शिवा राजकुमार के सामने पेश किया, जिन्होंने इसे तुरंत पसंद कर लिया। शिवा राजकुमार का मानना है कि सिनेमा में इंसानी भावनाओं को छूने और जीवन के हर पहलू को दर्शाने की अद्भुत शक्ति होती है। वे अपने किरदार से भी काफी जुड़ाव महसूस करते हैं, जो उनकी निजी जिंदगी की तरह ही जिद्दी और स्पष्टवादी है।

सार्वभौमिक अपील और बहुस्तरीय स्क्रीनप्ले * अर्जुन जन्य का दृढ़ विश्वास है कि '45' एक सार्वभौमिक फिल्म है जो सभी दर्शकों को पसंद आएगी। * इसका स्क्रीनप्ले भी अनोखे ढंग से तैयार किया गया है, जिसमें एक ही कहानी में आपको तीन से चार परतें देखने को मिलेंगी, जो दर्शकों को सोचने पर मजबूर करेंगी।

साउथ सिनेमा का बढ़ता प्रभाव और दबाव 'KGF', 'कांतारा' और '777 चार्ली' जैसी कन्नड़ फिल्मों की वैश्विक सफलता ने दर्शकों की उम्मीदें बढ़ा दी हैं। शिवा राजकुमार इस दबाव को महसूस करते हैं, लेकिन उनका मानना है कि असली आनंद इसी चुनौती में छिपा होता है। वह कहते हैं कि हर बार 'कांतारा' या 'KGF' जैसी फिल्में बनाना संभव नहीं है, लेकिन एक अद्वितीय और मजबूत स्क्रिप्ट की हमेशा मांग रहती है। '45' भी एक ऐसी सार्वभौमिक कहानी है जो हर किसी को एक विशेष संदेश देगी।

साउथ फिल्मों की सफलता के पीछे का रहस्य शिवा राजकुमार ने साउथ की फिल्मों की सुपरहिट होने के पीछे दो सबसे बड़ी ताकतों को उजागर किया है: * संस्कृति और भावनाएं: उनके अनुसार, ये दोनों तत्व हमारी फिल्मों की नींव हैं, जो दर्शकों से गहरा भावनात्मक जुड़ाव बनाते हैं। * भावनात्मक जुड़ाव: 'कभी खुशी कभी गम', 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे' जैसी हिंदी फिल्मों का उदाहरण देते हुए, उन्होंने बताया कि भावनाएं ही उन्हें सुपरहिट बनाती हैं। * देशभक्ति या ईश्वर-भक्ति: 'धुरंधर' जैसी फिल्मों में देशभक्ति या कर्नाटक की कई सुपरहिट फिल्मों में ईश्वर-भक्ति की तरह, भावनाओं का होना दर्शकों से मजबूत संबंध स्थापित करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

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